
अम्बिकापुर : सरगुजिहा बोली पर बालक को स्कूल में दाखिला नहीं देने का मामला, जिला शिक्षा अधिकारी ने गठित दल की जांच के बाद की कठोर कार्रवाई
शहर के निजी स्कूल स्वरंग किड्स अकादमी में सरगुजिहा बोली बोलने पर एक चार वर्षीय बालक को दाखिला नहीं दिए जाने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार झा ने गठित समिति द्वारा किए गए जांच में आरोपों की पुष्टि पाए जाने पर स्कूल पर एक लाख रूपए का अर्थदंड अधिरोपित किया है।
साथ ही आगामी आदेश तक संस्था के संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का भी आदेश जारी किया गया है। विदित हो कि शहर के चोपड़ापारा निवासी राजकुमार यादव अपने चार वर्षीय पुत्र सत्यम का नर्सरी कक्षा में एडमिशन के लिए स्वरंग किड्स अकादमी गया था। स्कूल प्रबंधन के द्वारा दाखिला लेने के पूर्व डेमो क्लास में बच्चे को करीब एक सप्ताह बुलाया गया, इसके बाद यह दलील देते हुए कि यह बच्चा सरगुजिहा बोली में बातचीत करता है जबकि स्कूल में अध्ययनरत बड़े घर के बच्चे हिंदी में बोलते हैं। ऐसी स्थिति में सरगुजिहा बोली का असर हिंदी में बातचीत करने वाले बच्चों पर भी पड़ जाएगी।
यह बेतुका दलील देते हुए स्कूल प्रबंधन के द्वारा बच्चे का दाखिला लेने से इंकार कर दिया गया था। इस संबंध में नवभारत के आज 18 अप्रैल के सरगुजा अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया गया था। मामले को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने जिला शिक्षा अधिकारी को इसकी जांच और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कलेक्टर के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा शासकीय उमावि केदारपुर की प्राचार्य रूमी घोष की अध्यक्षता में जांच दल का गठन किया गया था। जांच दल के द्वारा सभी पहलुओं की जांच की गई, जिसमें यह प्रमाणित पाया गया कि स्कूल प्रबंधन के द्वारा निःशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिनियम 2009-10 और शासन द्वारा जारी निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा स्वरंग किड्स अकादमी के खिलाफ उक्त कार्रवाई की गई।
